•   Wednesday, 04 Feb, 2026
The vows of "living and dying together" seen and heard in films became reality.

फिल्मों में सुनी–देखी जाने वाली “साथ जीने–मरने” की कसमें हकीकत बन गईं

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  Varanasi ki aawaz

फिल्मों में सुनी–देखी जाने वाली “साथ जीने–मरने” की कसमें हकीकत बन गईं

गया जिले के परैया प्रखंड अंतर्गत मंझिआवां पंचायत के रामडीह गांव में एक ऐसा हृदयविदारक दृश्य सामने आया, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। यहां पति की मौत के महज 10 मिनट बाद पत्नी ने भी सदमे में दम तोड़ दिया। अब दोनों की एक साथ अर्थी उठेगी और एक ही चिता पर अंतिम संस्कार होगा।
रामडीह गांव निवासी नंदकिशोर शर्मा (60 वर्ष) और उनकी पत्नी मानती देवी (58 वर्ष) वर्षों से एक-दूसरे के सहारे जीवन जी रहे थे। शुक्रवार की अहले सुबह अचानक नंदकिशोर शर्मा को सीने में तेज दर्द उठा। परिजन कुछ समझ पाते, इससे पहले ही उन्हें हार्ट अटैक आया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पति के प्राण जाते ही मानती देवी पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पति को मृत देख वे गहरे सदमे में चली गईं और बेहोश हो गईं। परिजन उन्हें आनन-फानन में चिकित्सक के पास ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि पति की मौत के करीब 10 मिनट बाद ही मानती देवी ने भी प्राण त्याग दिए।
इस घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया। जिसने भी यह खबर सुनी, उसकी आंखें नम हो गईं। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और हर कोई इस दंपती की अटूट प्रेम-कथा को याद कर भावुक हो रहा है।
एक समाचार के वजीरगंज प्रतिनिधि प्रभाकर कुमार, जो मृतक नंदकिशोर शर्मा के बड़े दामाद हैं, ने बताया कि दंपती के एक पुत्र और चार पुत्रियां हैं। सभी बेटियों का विवाह हो चुका है, जबकि पुत्र कोलकाता में निजी कार्य करता है। करीब एक सप्ताह पहले दोनों पति-पत्नी अपने बेटे-बहू के पास कोलकाता से एक माह रहकर लौटे थे। दो दिन पहले नंदकिशोर शर्मा को खांसी और सीने में दर्द की शिकायत हुई थी, जिसके बाद गया के चिकित्सक डॉ. आर.के. रश्मि से परामर्श लेकर दवा ली गई थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
अब शुक्रवार की रात गांव में एक साथ दो चिताएं सजेंगी, लेकिन अग्नि एक ही चिता पर दी जाएगी। एक साथ उठने वाली अर्थी और एक साथ होने वाला दाह संस्कार देखकर हर आंख छलक पड़ेगी।
रामडीह गांव में यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक भावुक संदेश बन गई है—कि सच्चा साथ जीवन तक ही नहीं, मृत्यु तक भी साथ निभाता है।

रिपोर्ट- कुणाल चौरसिया.. गया जी..बिहार
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